बदसलूकी मेरा लहजा नही है
बदमिजाजी मेरा उसूल है,
दिल में रख या दिमाग में
तेरा इश्क मुझे कुबूल है----'
नीरू"निराली"
Monday, March 20, 2017
Friday, March 17, 2017
Saturday, March 4, 2017
अफसोस
वो छुप सकते थे पहलू में
मगर मैने नही रोका,,
जिन्हे औरों की चाहत हो
वो हर्गिज बन्ध नही सकते------
खोजते रहते है जो जिन्दगी को
दर-बदर हरदम,,
अपने दहलीज का घूॅघट भी
जो उठा नही सकते--
कसम से चाहता है दिल
लगा दूॅ आग गुरुबत को,,
तमाशा देखने वाले
धुॅऐ से जल नही सकते----
Saturday, February 18, 2017
फिर आ जाओ
किया था तुमने जब स्वीकार
लुटाकर सब भूॅलों पर प्यार,,
बिछी थी अधरों पर मुस्कान
ह्दय में उठा था तब मनुहार--!
कहाॅ हो फिर आ जाओ--?
टूटते स्वर को लिया था बाॅध
दी थी मेरे गीतों को एक तान,
जहाॅ को दिये थे मेरे बोल
बना दी जिसने एक पहचान,
कहाॅ हो फिर आ जाओ--?
भर दिये थे तुमने जज्बात
आलिंगन कर मेरे एहसास
ठहरे पानी में हो बरसात
कहीं न बीते ये मधुमास,
कहाॅ हो फिर आ जाओ--?
विरह व्यथा बढती दिनरात
प्राण कहते न अपनी बात
नैनों से हो निसदिन बरसात
करुणामय झुलसी काया जात,
कहाॅ हो फिर आ जाओ--?
नीरू"निराली"
Friday, February 17, 2017
धुॅधला जीवन
धुँधला जीवन का खेल हुआ --------
जब उम्र ढली तब पता चला
कैसे लोगों से मेल हुआ -------------
तेरे जीवन का अंधियारा
आँखों के दीये से दूर किया ----------
जब आज हमारी बारी है
दिया बाती से दूर किया ---------
जब लड़खड़ाता बचपन था तेरा
मेरा हाथ तेरी बैशाखी थे --------
तुझे ऊँचाइयाँ छूने के लिए
मैंनें सबकुछ था बेच दिया -------
वक्त ने ऐसा बड़ा किया
मुझे बुड्डा तुझे जवान किया --------
कमज़ोर हाथ माँगने लगे
बैशाखी तेरे हाथों की --------
कंधा देने में वक्त अभी
धंधा भी मेरा बेच दिया --------
नीरू"निराली"
इन्तजार
दूर से उसे चुपके से देखती थी,
काश ! कोई पवन ऐसी चल जाए-----
जो ये पतझड बनकर ही सही
मुझपर बरस जाए-----
किन्तु--- वो दुनियाँ से बेखबर
काले वादलों की तरह---
रेशम की छाँव मे लुप्त
हिमालय की गोद में समाया---
जीवन के दो रंग लिए
एक तनहा एक संग लिए--
बेअसर बेआवाज
दद॔ में लुप्त गूजती रही--
आवाज वीरानो में
आखों में इन्तजार----
और फिर--इन्तजार----------
नीरू"निराली"
