Saturday, May 20, 2017

स्मृतियों से झटक मुझे
गर तुम्हे चैन मिल जाए,
जाओ प्रिय दुर्भाग्य तुम्हारा
प्रीत न पीछे आए------------
नीरू"निराली"

Friday, May 12, 2017

गीत

मै मुस्कुराती नहीं हूॅ
पर तन्हाई खिलखिलाती है मुझमें
मै जब भी रूठती हूॅ खुद से
वो परेशानियों का
सबब पूँछती है मुझसे
तब मै मुस्कुराकर कहती हूॅ
बस तू खुश रहे मुझमें
मै जिन्दा हूँ तुझमें
टिक-टिक सुई की आवाज भी न गूँजे जहाॅ
वो ले जाती है वो मुझे नितान्त अकेले में
पूँछती है एक सवाल
क्या तुम्हे खुद से है कोई मलाल ?
झुक जाती है नजरें बिना जवाब के
हाँ है मुझे खुद से मलाल
मेरी काया से लेकर
आत्मा तक जिसने भेद डाली
मेरे इस उपवन का एकमात्र
वही माली
ये तन्हाई तू भी अभी सोच ले
रहना है तुझे इसी वीराने में
क्या तू रह पायेगी ??

Wednesday, April 5, 2017

हम लुटते जा रहे थे हसरतों के नाम पर
छलती रही वफा हमें अपनो के नाम पर
सोचा था कि चलते रहेंगे साथ रास्ते
जुदा हुई है राह मंजिलों के नाम पर
-शुभरात्री
नीरू"निराली"

Saturday, April 1, 2017

हर पल सुख के समुन्दर मे तैरती हूॅ
खोई हुई लहरों को,,
भले ही साहिल की तलाश हो
मै तो तुझमें ही मजधार, पतवार
और फिर किनारा ढूँढती हूॅ----------
नीरू"निराली"

Monday, March 27, 2017

बुत बनकर के रह जायेंगे
वो मीलों के सब पत्थर,,
खाकर ठोकरें जिनसे
तराशा है नसीबों को-----------शुभप्रभात
नीरू"निराली"

Friday, March 24, 2017

प्रेम की लौ

प्रेम की लौ
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विचलित तेरे अन्तःकरण में
जब पुरानी याद थी,
कैसे तेरे उर में समाई बात
मुझसे प्रेम की--!

धमनियाँ मंदिम में भी वो
ताप सा बढने लगा,
उन्माद सी जलने लगी
ज्वाला भी मुझमें प्रेम की--!

नस्तर से जो चुभने लगे
वो शूल मै चुनने लगी,
होने लगी विस्मृत मधुर
पीड़ा भी मुझमें प्रेम की--!

सहस्र दम भरने लगी थी
रात तारों से भरी
बेसुध सी सुस्त  चेतना
खोई थी मुझमें प्रेम की--!

विस्मित सी होकर प्रेम मै
जिस पर लुटाती फिर रही,
समाधि सी जलने ही दे वो
लौ तो मुझमें प्रेम की--!

नीरू"निराली"

Wednesday, March 22, 2017

Srivastav
बगावत खुद से कर ये दिल
भुला दे उस दीवाने को,,
मौसम की हर इक वादी में
जिसने घर बना रखे-----------शुभरात्री
नीरू"निराली"