Wednesday, April 5, 2017

हम लुटते जा रहे थे हसरतों के नाम पर
छलती रही वफा हमें अपनो के नाम पर
सोचा था कि चलते रहेंगे साथ रास्ते
जुदा हुई है राह मंजिलों के नाम पर
-शुभरात्री
नीरू"निराली"

Saturday, April 1, 2017

हर पल सुख के समुन्दर मे तैरती हूॅ
खोई हुई लहरों को,,
भले ही साहिल की तलाश हो
मै तो तुझमें ही मजधार, पतवार
और फिर किनारा ढूँढती हूॅ----------
नीरू"निराली"

Monday, March 27, 2017

बुत बनकर के रह जायेंगे
वो मीलों के सब पत्थर,,
खाकर ठोकरें जिनसे
तराशा है नसीबों को-----------शुभप्रभात
नीरू"निराली"

Friday, March 24, 2017

प्रेम की लौ

प्रेम की लौ
___________________
विचलित तेरे अन्तःकरण में
जब पुरानी याद थी,
कैसे तेरे उर में समाई बात
मुझसे प्रेम की--!

धमनियाँ मंदिम में भी वो
ताप सा बढने लगा,
उन्माद सी जलने लगी
ज्वाला भी मुझमें प्रेम की--!

नस्तर से जो चुभने लगे
वो शूल मै चुनने लगी,
होने लगी विस्मृत मधुर
पीड़ा भी मुझमें प्रेम की--!

सहस्र दम भरने लगी थी
रात तारों से भरी
बेसुध सी सुस्त  चेतना
खोई थी मुझमें प्रेम की--!

विस्मित सी होकर प्रेम मै
जिस पर लुटाती फिर रही,
समाधि सी जलने ही दे वो
लौ तो मुझमें प्रेम की--!

नीरू"निराली"

Wednesday, March 22, 2017

Srivastav
बगावत खुद से कर ये दिल
भुला दे उस दीवाने को,,
मौसम की हर इक वादी में
जिसने घर बना रखे-----------शुभरात्री
नीरू"निराली"

Tuesday, March 21, 2017

ठहरे कदमों की आहट
पथ का पता नहीं बताती,,
फिर भी एक आहट के लिए
तमाम सरसराहटें सुनती है जिन्दगी----------
नीरू"निराली"

तुम क्यों तपते हो मेरी जलन में
ये आग तो तुम्ही ने लगाई है-?
क्यों खुश होते हो हमें जिन्दा करके
मेरी मौत का पैगाम ये जिन्दगी ही लाई है-?
क्यों नहीं कहते हो तुम इतना
कि तू अपनी नहीं पराई है-?
लम्हों की बात क्या गुजर गए है सारे
मिलन की रात दुबारा फिर कभी न आई है-?
नीरू"निराली"